शुल्क की आहट और यूपीआई का भविष्य
— डॉ. प्रियंका सौरभ (सद्वार्ता)
अंततः अमेरिकी दबाव ने असर दिखाया—यह निष्कर्ष आकर्षक जरूर है, लेकिन 14 सितंबर की वित्त मंत्रालय की अधिसूचना को समझने के लिए थोड़ी सावधानी जरूरी है। अधिसूचना ने ₹2,000 तक के यूपीआई लेन-देन और रुपे डेबिट कार्ड भुगतान पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष शुल्क लगाने से बैंकों और भुगतान-प्रणाली प्रदाताओं को रोक दिया है। परंतु ₹2,000 से अधिक के यूपीआई भुगतान पर तत्काल कोई उपभोक्ता शुल्क लागू नहीं किया गया है; अधिसूचना ने केवल बड़े लेन-देन पर भविष्य में शुल्क या एमडीआर की संभावना के लिए रास्ता खुला छोड़ा है।
फिर भी चिंता वास्तविक है। क्योंकि नीतियों का असर केवल उस शब्द से नहीं समझा जाता जो अधिसूचना में लिखा है; यह भी देखना पड़ता है कि उसके बाद बाजार का व्यवहार किस दिशा में जाता है। आज शुल्क सीधे ग्राहक से न लिया जाए, कल व्यापारी से लिया जाए और परसों व्यापारी उसे वस्...



