Monday, November 2

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इतिहास की परतों में छुपी स्त्री, संस्कृति और सभ्यता का पुनर्पाठ: राखीगढ़ी में भारतीय स्त्री की ऐतिहासिक भूमिका की तलाश
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इतिहास की परतों में छुपी स्त्री, संस्कृति और सभ्यता का पुनर्पाठ: राखीगढ़ी में भारतीय स्त्री की ऐतिहासिक भूमिका की तलाश

हरियाणा के राखीगढ़ी से मिले पुरातात्विक अवशेष, प्राचीन समाज में स्त्री की स्थिति, सांस्कृतिक परंपराओं और भारतीय सभ्यता के विकास को नए दृष्टिकोण से समझने का अवसर देते हैं। डॉ. प्रियंका सौरभ कवयित्री, स्वतंत्र पत्रकार एवं स्तंभकार उब्बा भवन, आर्य नगर, हिसार, हरियाणा–125001 प्रस्तावना इतिहास केवल राजाओं, युद्धों, साम्राज्यों और राजनीतिक परिवर्तनों का वृत्तांत नहीं है। वह उन असंख्य स्त्री-पुरुषों के जीवन, श्रम, विश्वास, संबंधों और सांस्कृतिक योगदान की कहानी भी है, जिन्होंने सभ्यताओं का निर्माण किया। फिर भी इतिहास की प्रचलित पुस्तकों में लंबे समय तक स्त्री की भूमिका अपेक्षाकृत सीमित दिखाई देती रही है। उसे कभी परिवार की संरक्षिका, कभी परंपराओं की वाहिका और कभी सत्ता-संघर्षों की मूक सहभागी के रूप में प्रस्तुत किया गया, जबकि समाज और संस्कृति के निर्माण में उसके वास्तविक योगदान को सम...
सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा का आयोजन 24 अक्टूबर को, प्राचीन करेड़ी माता मंदिर के होंगे दर्शन
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सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा का आयोजन 24 अक्टूबर को, प्राचीन करेड़ी माता मंदिर के होंगे दर्शन

शाजापुर, मध्य प्रदेश। पत्रकार संगठनों की साझा आवाज़ के रूप में कार्यरत स्टेट प्रेस क्लब, मध्य प्रदेश की ओर से शनिवार, 24 अक्टूबर 2026 को ‘सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा’ का आयोजन किया जा रहा है। इस यात्रा के अंतर्गत शाजापुर स्थित प्राचीन करेड़ी माता मंदिर के दर्शन एवं यात्रा कवरेज का कार्यक्रम निर्धारित किया गया है। कार्यक्रम विवरण आयोजक: स्टेट प्रेस क्लब, मध्य प्रदेश यात्रा: सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा तिथि: शनिवार, 24 अक्टूबर 2026 स्थान: शाजापुर, मध्य प्रदेश प्रमुख पड़ाव: प्राचीन करेड़ी माता मंदिर बस प्रस्थान: इंदौर से दोपहर 1 बजे (SDNA)...
भगदड़ की त्रासदी
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भगदड़ की त्रासदी

- डॉ. सत्यवान सौरभ भारत में धार्मिक आयोजनों, त्योहारों, राजनीतिक रैलियों, खेल समारोहों और रेलवे स्टेशनों पर लाखों लोगों की उपस्थिति सामान्य बात है। ऐसी विशाल भीड़ यदि वैज्ञानिक ढंग से प्रबंधित न हो, तो कुछ ही क्षणों में भयावह भगदड़ में बदल सकती है। भगदड़ केवल भीड़ के दौड़ने का परिणाम नहीं होती, बल्कि अत्यधिक भीड़-घनत्व, अनियंत्रित दबाव और निकासी व्यवस्था की विफलता से उत्पन्न होने वाली मानव-निर्मित आपदा है। अक्टूबर 2026 में कोलकाता दुर्गा पूजा के दौरान हुई भगदड़, जिसमें 19 लोगों की मृत्यु हुई, ने यह स्पष्ट कर दिया कि आधुनिक तकनीक और अनुभव होने के बावजूद भारत में भीड़ प्रबंधन की गंभीर कमियां बनी हुई हैं। इसलिए आवश्यक है कि इस समस्या को कानून-व्यवस्था के बजाय आपदा जोखिम न्यूनीकरण के दृष्टिकोण से देखा जाए। भारत में भगदड़ की घटनाओं के पीछे सबसे बड़ा कारण क्षमता से अधिक भीड़ का एकत्र होना ...
रेखा गुप्ता का ‘राम’ वाला वायरल वीडियो: जुबान फिसली या AI का खेल? सवालों के घेरे में सच्चाई
Breaking news, Opinion, Political Analysis, Politics

रेखा गुप्ता का ‘राम’ वाला वायरल वीडियो: जुबान फिसली या AI का खेल? सवालों के घेरे में सच्चाई

रामलीला के मंच से कथित बयान पर विवाद, मुख्यमंत्री ने वीडियो को AI-निर्मित बताया; निष्पक्ष जाँच के बिना किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी नई दिल्ली | SDNA विशेष विश्लेषण दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का रामलीला कार्यक्रम से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। वीडियो में कथित तौर पर उनके मुंह से ‘रावण’ की जगह ‘राम’ शब्द निकलता सुनाई देता है। इस क्लिप को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। एक ओर आम आदमी पार्टी के नेताओं ने इसे धार्मिक भावनाओं से जुड़ा गंभीर मामला बताया है, तो दूसरी ओर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने वीडियो को AI से तैयार किया गया बताया है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर वीडियो की वास्तविकता क्या है और इस विवाद की निष्पक्ष जाँच कैसे होनी चाहिए? क्या है पूरा मामला? मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह विवाद 13 अक्टूबर की रात दिल्ली के आजादपुर स्थित केवल...
जलते पुतले, बढ़ते रावण: दशहरे का बदलता अर्थ
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जलते पुतले, बढ़ते रावण: दशहरे का बदलता अर्थ

पुतलों का दहन नहीं, मन और समाज में छिपी बुराइयों का संहार ही दशहरे का असली संदेश है। — डॉ. सत्यवान सौरभ हर साल दशहरे की शाम रावण के विशाल पुतले धू-धू कर जलते हैं। आतिशबाजी की चमक, पटाखों की गूंज और दर्शकों की तालियों के बीच बुराई पर अच्छाई की जीत का उत्सव मनाया जाता है। कुछ ही मिनटों में रावण का पुतला राख हो जाता है और लोग विजयादशमी की शुभकामनाएँ देते हुए अपने घर लौट जाते हैं। लेकिन एक सवाल हर साल हमारे सामने खड़ा रहता है—यदि रावण सचमुच मर रहा है, तो समाज में बुराइयाँ लगातार बढ़ क्यों रही हैं? आखिर हर साल जलने वाला रावण कौन है और हर साल नए रूप में खड़ा होने वाला रावण कौन? दशहरा केवल एक धार्मिक पर्व या मनोरंजन का अवसर नहीं, बल्कि आत्ममंथन और सामाजिक चेतना का पर्व है। रावण दहन का वास्तविक उद्देश्य हमें यह याद दिलाना है कि अहंकार, अन्याय, छल, लोभ और अनैतिकता चाहे कितनी ही शक्तिशाली क...
अंग-प्रदर्शन: भक्ति के आगे अब बड़ी चुनौती!
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अंग-प्रदर्शन: भक्ति के आगे अब बड़ी चुनौती!

नवरात्रि के पावन पर्व पर गरबा और डांडिया की परंपरा के सामने सवाल—क्या मां दुर्गा की आराधना का मंच फैशन, ग्लैमर और दिखावे की प्रतिस्पर्धा में बदलता जा रहा है? नवरात्रि मां दुर्गा की उपासना, शक्ति की साधना और श्रद्धा का पर्व है। गरबा और डांडिया केवल नृत्य नहीं, बल्कि आस्था, संस्कृति और सामूहिक भक्ति की अभिव्यक्ति हैं। लेकिन बदलते दौर में कुछ आयोजनों के स्वरूप को देखकर यह सवाल उठने लगा है कि क्या अंग-प्रदर्शन की बढ़ती प्रवृत्ति अब भक्ति के सामने एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है? जब मां की आराधना के लिए सजे मंच पर चर्चा भजनों, आरती और धार्मिक भावना से अधिक परिधानों, फैशन और आकर्षक प्रस्तुतियों की होने लगे, तो उत्सव की मूल भावना पर विचार करना आवश्यक हो जाता है। आधुनिक परिधान, बैकलेस या डीप-नेक ड्रेस अपने आप में किसी की आस्था का पैमाना नहीं हैं, लेकिन धार्मिक आयोजन में यदि दिखावे की होड़ भक्त...
बेटे के एक निबंध ने खोल दी पिता के त्याग की किताब, स्कूल में रो पड़ा पूरा स्टाफ
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बेटे के एक निबंध ने खोल दी पिता के त्याग की किताब, स्कूल में रो पड़ा पूरा स्टाफ

‘मेरे पापा’ पर लिखे चंद शब्दों ने बयां कर दी उस पिता की अनकही कहानी, जो बच्चों की खुशियों के लिए अपनी जरूरतें और सपने तक भुला देता है (SDNA) विशेष भावनात्मक आलेख। स्कूल में बच्चों को अक्सर अपने परिवार, माता-पिता और जीवन के अनुभवों पर निबंध लिखने को कहा जाता है। लेकिन कभी-कभी बच्चों के छोटे-छोटे शब्द ऐसी सच्चाई सामने ला देते हैं, जिसे बड़े लोग वर्षों साथ रहने के बाद भी समझ नहीं पाते। एक ऐसी ही भावुक कहानी में पिता के त्याग, उसकी खामोशी और परिवार के प्रति समर्पण को बेहद मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया गया है। कहानी के अनुसार, एक दिन स्कूल के प्रिंसिपल ने एक छात्र के माता-पिता को बुलाया। उन्होंने बताया कि बच्चों से ‘मेरे पापा’ विषय पर निबंध लिखवाया गया था, लेकिन उनके बेटे की कॉपी पढ़कर शिक्षक भावुक हो उठे। माता-पिता घबराए हुए थे। आखिर ऐसा क्या लिख दिया था उनके बेटे ने? प्रिंसिपल ने ब...
जलवायु नीति के स्वास्थ्य रिपोर्ट कार्ड में भारत को सिर्फ 2 अंक, वायु प्रदूषण पर चिंता बढ़ी
Natioanal, Opinion

जलवायु नीति के स्वास्थ्य रिपोर्ट कार्ड में भारत को सिर्फ 2 अंक, वायु प्रदूषण पर चिंता बढ़ी

GCHA की हेल्दी NDC स्कोरकार्ड रिपोर्ट में भारत का प्रदर्शन कमजोर; 32 में से मिले महज 2 अंक, जलवायु परिवर्तन और जनस्वास्थ्य को एक साथ देखने की जरूरत पर जोर नई दिल्ली। जलवायु परिवर्तन का असर अब केवल बढ़ते तापमान, अनियमित बारिश और प्राकृतिक आपदाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लोगों की सेहत, वायु गुणवत्ता और स्वास्थ्य सेवाओं पर भी गंभीर प्रभाव डाल रहा है। इसी संबंध को ध्यान में रखते हुए जारी हेल्दी NDC स्कोरकार्ड में भारत को 32 में से केवल 2 अंक मिले हैं। रिपोर्ट के अनुसार, देश की जलवायु योजना में स्वास्थ्य और वायु प्रदूषण से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया है। ग्लोबल क्लाइमेट एंड हेल्थ अलायंस (GCHA) ने 14 अक्टूबर 2026 को यह स्कोरकार्ड जारी किया। यह गठबंधन 300 से अधिक स्वास्थ्य पेशेवर संगठनों और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े नागरिक संगठनों का प्रतिनिधित्व करता है। र...
आंदोलन से सत्ता परिवर्तन तक: क्या पुराने राजनीतिक आंदोलनों ने मोदी और आम आदमी पार्टी के उदय की जमीन तैयार की?
Opinion, Politics

आंदोलन से सत्ता परिवर्तन तक: क्या पुराने राजनीतिक आंदोलनों ने मोदी और आम आदमी पार्टी के उदय की जमीन तैयार की?

पुरुषोत्तम मेघवाल के वायरल वीडियो में कांग्रेस, अन्ना हजारे आंदोलन, कॉरपोरेट जगत और भाजपा के राजनीतिक विस्तार को लेकर उठाए गए सवालों ने छेड़ी नई बहस (SDNA) विशेष लेख भारतीय राजनीति में सत्ता का परिवर्तन केवल चुनावी नतीजों से नहीं समझा जा सकता। इसके पीछे जनआंदोलन, भ्रष्टाचार के आरोप, सरकारों के फैसले, जनता का असंतोष, राजनीतिक नेतृत्व और आर्थिक हितों की भी भूमिका होती है। सोशल मीडिया पर प्रसारित पुरुषोत्तम मेघवाल के एक वीडियो में इन्हीं पहलुओं को जोड़ते हुए कांग्रेस के कमजोर होने, नरेंद्र मोदी के राष्ट्रीय राजनीति में उभार और आम आदमी पार्टी के गठन की पृष्ठभूमि पर सवाल उठाए गए हैं। वीडियो में प्रस्तुत विचारों के अनुसार, वर्ष 2011 के अन्ना हजारे के जनलोकपाल आंदोलन ने देश की राजनीति में ऐसा माहौल बनाया, जिसने एक ओर अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में आम आदमी पार्टी के उदय का रास्ता खोला और ...
जो समाज का दर्द सुनते हैं, उनकी पीड़ा कौन समझेगा? संघर्षग्रस्त क्षेत्रों में सामाजिक कार्यकर्ताओं के मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर सवाल
Opinion

जो समाज का दर्द सुनते हैं, उनकी पीड़ा कौन समझेगा? संघर्षग्रस्त क्षेत्रों में सामाजिक कार्यकर्ताओं के मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर सवाल

(SDNA) बस्तर, छत्तीसगढ़। समाज के वंचित और संघर्षग्रस्त वर्गों की समस्याओं को सुनना, उन्हें सहायता पहुंचाना और बेहतर भविष्य की राह दिखाना सामाजिक कार्यकर्ताओं की अहम जिम्मेदारी है। लेकिन हिंसा, विस्थापन, असुरक्षा और अपनों को खोने की घटनाओं के बीच काम करने वाले इन कार्यकर्ताओं की अपनी मानसिक परेशानियों पर अक्सर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता। समुदाय के दुख-दर्द को समझने वाले इन लोगों की भावनाओं को आखिर कौन समझता है? यह सवाल अब सामाजिक क्षेत्र की कार्य-संस्कृति और संस्थागत जिम्मेदारी पर नए सिरे से विचार करने की जरूरत बताता है। बस्तर और दंतेवाड़ा जैसे क्षेत्रों में काम करने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए चुनौतियां केवल परियोजनाओं को पूरा करने या निर्धारित लक्ष्यों को हासिल करने तक सीमित नहीं हैं। यहां रोजाना सामने आने वाली घटनाएं उनके मन और भावनाओं पर गहरा प्रभाव छोड़ती हैं। दिनभर काम करने...