Wednesday, November 4

अवैध शराब के कारोबार पर प्रशासन सख्त, आरोपियों पर जिला बदर और NSA की कार्रवाई के निर्देश


इंदौर संभाग में अवैध मदिरा के खिलाफ अभियान तेज करने के निर्देश; आबकारी विभाग ने वित्तीय वर्ष में धारा 34(2) के तहत 5,043 और धारा 34(1) के तहत 27,147 मामले दर्ज किए

इंदौर, 3 नवंबर 2026।

इंदौर संभाग में अवैध शराब के निर्माण, भंडारण, परिवहन और बिक्री पर अंकुश लगाने के लिए प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। संभागायुक्त श्री भास्कर लाक्षाकार ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि इस कारोबार में शामिल लोगों की पहचान कर उनके विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अवैध शराब के कारोबारियों के खिलाफ जिला बदर और राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत भी कार्रवाई की जाए।

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संभागायुक्त की अध्यक्षता में मंगलवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित बैठक में अवैध मदिरा से जुड़ी गतिविधियों की समीक्षा की गई। बैठक में यह बात भी सामने आई कि इंदौर शहर में कुछ शराब दुकानें निर्धारित समय के बाद भी खुली रहने की शिकायतें मिली हैं। इस पर संभागायुक्त ने आबकारी विभाग को संबंधित दुकानों के विरुद्ध कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि जिन स्थानों पर गांजे की खेती पकड़ी गई है, वहां स्थानीय प्रशासनिक अमले की जिम्मेदारी तय की जाए। अवैध शराब के भंडारण से जुड़े आबकारी अधिनियम की धारा 34(2) के मामलों में न्यायालयों में प्रभावी पैरवी की जाए, ताकि दोषियों को सजा दिलाई जा सके।

संभागायुक्त ने संवेदनशील क्षेत्रों, सीमावर्ती इलाकों, प्रमुख मार्गों और उन स्थानों पर विशेष निगरानी रखने को कहा, जहां अवैध शराब के परिवहन या बिक्री की आशंका रहती है। नियमित जांच अभियान चलाकर शराब के स्रोत और वितरण नेटवर्क का पता लगाने तथा इस कारोबार में शामिल लोगों के सहयोगियों की जानकारी जुटाने पर भी जोर दिया गया।

उन्होंने कहा कि अवैध और मिलावटी शराब जनस्वास्थ्य तथा सामाजिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है। इसके सेवन से जनहानि की आशंका बनी रहती है। इसलिए आबकारी, पुलिस और अन्य संबंधित विभाग आपसी समन्वय से काम करें। प्राप्त शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई हो और अभियान की नियमित समीक्षा की जाए।

शासकीय शराब दुकानों के निर्धारित समय पर खुलने और बंद होने की निगरानी करने के साथ ढाबों तथा हाईवे पर भी सघन जांच के निर्देश दिए गए। बैठक में दीप पर्व के दौरान गौतमपुरा में आयोजित होने वाले पारंपरिक हिंगोट युद्ध के लिए अग्नि सुरक्षा और कानून-व्यवस्था सुनिश्चित करने पर भी चर्चा हुई।

बैठक में आईजी श्री अनुराग, उपायुक्त आबकारी श्री इंदरसिंह जामोद, इंदौर कलेक्टर श्री शिवम वर्मा सहित संभाग के सभी जिलों के कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक और संबंधित विभागों के अधिकारी शामिल हुए।

उपायुक्त आबकारी श्री इंदरसिंह जामोद ने बताया कि वित्तीय वर्ष के दौरान मध्यप्रदेश आबकारी अधिनियम, 1915 के तहत धारा 34(2) में 5,043 तथा धारा 34(1) में 27,147 प्रकरण दर्ज किए गए हैं।


इंदौर और धार के नियोजकों, उद्योग प्रतिनिधियों, सीए तथा अधिवक्ताओं ने लिया हिस्सा; श्रमिकों के अधिकार, वेतन और सामाजिक सुरक्षा पर हुई चर्चा

इंदौर, 3 नवंबर 2026।

देश में लागू नवीन श्रम संहिताओं की जानकारी उद्योगों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों तक पहुंचाने तथा उनके प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर इंदौर में जिला स्तरीय ‘श्रम संवाद’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रीतमलाल दुआ सभागृह में आयोजित इस क्षमता निर्माण एवं जागरूकता कार्यक्रम में इंदौर और धार जिले के नियोजकों तथा औद्योगिक प्रतिनिधियों को श्रम कानूनों के प्रावधानों और उनकी वैधानिक जिम्मेदारियों से अवगत कराया गया।

कार्यक्रम का आयोजन श्रम एवं रोजगार मंत्रालय, भारत सरकार और मध्यप्रदेश शासन के समन्वय से किया गया। इसमें श्रमायुक्त मध्यप्रदेश श्रीमती शीतला पटले (आईएएस), श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के संचालक श्री एस.आर. दत्ता, अवर सचिव श्री संजय तिवारी, एसोसिएशन ऑफ इंडस्ट्रीज मध्यप्रदेश के अध्यक्ष श्री प्रकाश जैन, पीथमपुर औद्योगिक संगठन के अध्यक्ष श्री गौतम कोठारी, उप संचालक श्री सांकेत पांडे, उप श्रमायुक्त श्री आशीष पालीवाल, श्रीमती मेघना भट्ट और श्रीमती रजनी मालवीय सहित विभिन्न अधिकारियों एवं प्रतिनिधियों ने अपने विचार रखे।

वक्ताओं ने नवीन श्रम संहिताओं के उद्देश्य, प्रमुख प्रावधानों और उन्हें व्यवहार में लागू करने की प्रक्रिया पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने उद्योग संचालकों और नियोजकों से श्रम कानूनों का पालन करने के साथ कर्मचारियों के हितों तथा अधिकारों के प्रति संवेदनशील रहने की अपील की।

संवाद के दौरान न्यूनतम वेतन, वेतन भुगतान, सामाजिक सुरक्षा, कर्मचारी भविष्य निधि (EPF), कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC), औद्योगिक संबंध, कार्यस्थल पर सुरक्षा एवं स्वास्थ्य और नियोजकों के कानूनी दायित्वों जैसे विषयों पर चर्चा हुई। औद्योगिक एवं व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में नई श्रम संहिताओं के अनुरूप आवश्यक व्यवस्थाएं विकसित करने की जानकारी भी दी गई।

कार्यक्रम में इंदौर और धार के विभिन्न उद्योगों एवं व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के नियोजकों, उद्योग संगठनों के प्रतिनिधियों, चार्टर्ड अकाउंटेंट्स और अधिवक्ताओं ने सहभागिता की। आयोजन का मुख्य उद्देश्य सभी संबंधित पक्षों को श्रम संहिताओं के प्रति जागरूक करना और उनके सुचारू क्रियान्वयन का मार्ग प्रशस्त करना रहा।

अंत में उप श्रमायुक्त श्रीमती मेघना भट्ट और पीथमपुर औद्योगिक संगठन के अध्यक्ष श्री गौतम कोठारी ने अतिथियों तथा प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।


वन और वन्यजीव संरक्षण के लिए 17,240.55 करोड़ रुपये, सिंचाई परियोजनाओं के लिए 4,103.73 करोड़ तथा नगरीय अधोसंरचना के लिए 700 करोड़ रुपये स्वीकृत

स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देने के लिए 610.51 करोड़ और लोकायुक्त संगठन के संचालन के लिए 573.85 करोड़ रुपये मंजूर

इंदौर, 3 नवंबर 2026।

मध्यप्रदेश में पर्यावरण संरक्षण, सिंचाई, शहरी सुविधाओं, स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश और प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में मंत्रि-परिषद ने 23,300 करोड़ रुपये से अधिक के वित्तीय प्रस्तावों को मंजूरी दी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को भोपाल स्थित मंत्रालय में हुई बैठक में ये निर्णय लिए गए।

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री श्री चैतन्य कुमार काश्यप ने बैठक के बाद कैबिनेट के फैसलों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वन एवं वन्यजीव संरक्षण से संबंधित नौ प्रमुख योजनाओं के लिए 17,240 करोड़ 55 लाख रुपये मंजूर किए गए हैं। वहीं पन्ना, विदिशा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली और उज्जैन की सिंचाई परियोजनाओं के संचालन की निरंतरता के लिए 4,103 करोड़ 73 लाख रुपये स्वीकृत हुए हैं।

इसके अलावा नगरीय क्षेत्रों में नागरिक सुविधाओं और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए 700 करोड़ रुपये, स्वास्थ्य क्षेत्र में उद्योगों एवं निवेश को प्रोत्साहन देने के लिए 610 करोड़ 51 लाख रुपये तथा लोकायुक्त संगठन के सुचारू संचालन के लिए 573 करोड़ 85 लाख रुपये की मंजूरी दी गई है। जबलपुर स्थित राजा शंकर शाह-कुंवर रघुनाथ शाह जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय के संचालन के लिए एक नियमित पद और 83 लाख 18 हजार रुपये के वार्षिक व्यय को भी स्वीकृति मिली है।

वन संरक्षण और वन्यजीव प्रबंधन के लिए 17,240.55 करोड़ रुपये

मंत्रि-परिषद ने वन विभाग की नौ प्रमुख योजनाओं के संचालन के लिए 17,240 करोड़ 55 लाख रुपये मंजूर किए हैं। यह राशि 16वें केंद्रीय वित्त आयोग की अवधि यानी 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक के लिए स्वीकृत की गई है।

इसमें सबसे बड़ा प्रावधान 10,664 करोड़ 79 लाख रुपये का कार्यकारी योजना संगठन एवं वन वृत्तों की स्थापना के लिए किया गया है। क्षतिपूर्ति वनीकरण योजना के लिए 1,994 करोड़ 30 लाख रुपये, राष्ट्रीय उद्यानों की स्थापना के लिए 1,623 करोड़ 79 लाख रुपये, इमारती लकड़ी उत्पादन के लिए 1,107 करोड़ 06 लाख रुपये तथा जू एवं रेस्क्यू सेंटर की स्थापना के लिए 604 करोड़ 23 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं।

इसके अतिरिक्त वन मुख्यालय, वन प्रशिक्षण केंद्रों, कार्ययोजना निर्माण और संरक्षित क्षेत्रों के बाहर वन्यप्राणी प्रबंधन के लिए भी बजट उपलब्ध कराया जाएगा।

इन योजनाओं का उद्देश्य वन प्रशासन को मजबूत करना, वनों का वैज्ञानिक प्रबंधन करना, जैव विविधता की रक्षा करना और वन्यजीवों के संरक्षण को प्रभावी बनाना है। दस वर्षीय कार्ययोजनाओं के माध्यम से वनों के सतत प्रबंधन की व्यवस्था की जाएगी। वन प्रशिक्षण केंद्रों में कर्मचारियों को प्रशिक्षित किया जाएगा, जबकि क्षतिपूर्ति वनीकरण के जरिए विकास कार्यों में वन भूमि के उपयोग से होने वाले पर्यावरणीय नुकसान को कम करने का प्रयास होगा।

इमारती लकड़ी उत्पादन योजना के अंतर्गत काष्ठ और बांस का वैज्ञानिक विदोहन, परिवहन एवं विक्रय किया जाएगा। राष्ट्रीय उद्यानों से संबंधित योजना के माध्यम से नौ टाइगर रिजर्व और दस राष्ट्रीय उद्यानों का संरक्षण एवं विकास किया जाएगा। संरक्षित क्षेत्रों के बाहर वन्यजीवों की निगरानी, सघन गश्त, बाघ मॉनिटरिंग और रेस्क्यू गतिविधियों को भी मजबूती मिलेगी। उज्जैन और जबलपुर में नए जू एवं रेस्क्यू केंद्र स्थापित करने की योजना भी इसमें शामिल है।

छह जिलों की सिंचाई परियोजनाओं के लिए 4,103.73 करोड़ रुपये

कृषि भूमि तक सिंचाई सुविधा पहुंचाने और जल प्रबंधन को मजबूत करने के लिए मंत्रि-परिषद ने पन्ना, विदिशा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली और उज्जैन की परियोजनाओं को वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक जारी रखने के लिए 4,103 करोड़ 73 लाख रुपये मंजूर किए हैं।

पन्ना जिले की मझगांव मध्यम सिंचाई परियोजना के लिए 69 करोड़ 36 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इसके अंतर्गत बांध का निर्माण कर 13,060 हेक्टेयर क्षेत्र में सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली विकसित की जा रही है।

विदिशा जिले की लटेरी तहसील में टेम नदी पर स्थित टेम मध्यम सिंचाई परियोजना के लिए 277 करोड़ 52 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है। इससे जिले की 12,814 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के साथ आसपास के क्षेत्रों की पेयजल जरूरतें पूरी करने का लक्ष्य है।

मऊगंज, सीधी और सिंगरौली में सिंचाई क्षमता बढ़ाने के लिए निर्माणाधीन सीतापुर हनुमना माइक्रो सिंचाई परियोजना के संचालन एवं रखरखाव के लिए 3,620 करोड़ 82 लाख रुपये मंजूर किए गए हैं। सोन नदी पर बैराज बनाकर संचित जल के माध्यम से 1,20,000 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई क्षमता विकसित की जाएगी।

उज्जैन में शिप्रा नदी का प्रवाह वर्षभर बनाए रखने के उद्देश्य से सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी परियोजना के लिए 136 करोड़ 3 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। योजना के तहत शिप्रा नदी पर सेवरखेड़ी बैराज बनाया जाएगा। वर्षा ऋतु में नदी से जल उठाकर सिलारखेड़ी बांध में संग्रहित किया जाएगा और जरूरत के अनुसार इसे पूरे वर्ष दोबारा शिप्रा नदी में प्रवाहित किया जाएगा।

शहरों की बुनियादी सुविधाओं के लिए 700 करोड़ रुपये

मुख्यमंत्री नगरीय क्षेत्र अधोसंरचना निर्माण योजना को दो वर्ष, यानी 1 अप्रैल 2027 से 31 मार्च 2029 तक जारी रखने का निर्णय लिया गया है। इसके लिए अतिरिक्त 700 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।

योजना के अंतर्गत नगरीय निकायों द्वारा पेयजल व्यवस्था, साफ-सफाई, स्ट्रीट लाइट, आपदा प्रबंधन और सड़कों एवं नालियों जैसे बुनियादी निर्माण कार्य किए जाते हैं। इसके अलावा श्मशान घाट, सामुदायिक भवन, खेल एवं मनोरंजन स्थल और रैन बसेरों का निर्माण भी इस योजना के दायरे में आता है।

कैबिनेट ने यह भी निर्णय लिया कि आगामी वर्ष में मुख्यमंत्री कार्यालय से निर्धारित सीमा से अधिक, लेकिन 500 करोड़ रुपये तक के प्रस्ताव प्राप्त होने पर जरूरत के अनुसार उनकी प्रशासनिक स्वीकृति दी जा सकेगी। भविष्य में अतिरिक्त राशि की मांग वित्त विभाग से अलग से की जाएगी।

स्वास्थ्य क्षेत्र में उद्योग और निवेश को 610.51 करोड़ रुपये का प्रोत्साहन

मध्यप्रदेश में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों और रोजगार के अवसरों को बढ़ाने के लिए ‘उद्योग निवेश संवर्धन सहायता योजना’ को 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक जारी रखने की मंजूरी दी गई है। इसके लिए 610 करोड़ 51 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं।

यह राज्य पोषित योजना है। इसके तहत मध्यप्रदेश हेल्थ सेक्टर इन्वेस्टमेंट प्रमोशन स्कीम 2020 और 2025 की नीतियों में निर्धारित प्रावधानों के अनुसार पूंजीगत परिसंपत्तियां तैयार करने वाले निवेशकों को सब्सिडी दी जाती है। सरकार का उद्देश्य स्वास्थ्य क्षेत्र में उद्योगों को प्रोत्साहित करना, निवेश बढ़ाना और प्रदेश में रोजगार के नए अवसर तैयार करना है।

लोकायुक्त संगठन के लिए 573.85 करोड़ रुपये

लोकायुक्त संगठन के कामकाज को सुचारू रूप से जारी रखने के लिए 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक की अवधि के लिए 573 करोड़ 85 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं।

इसमें कार्यालय स्थापना, कर्मचारियों के वेतन और कार्यालय संचालन पर 553 करोड़ 85 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। वहीं विभागीय परिसंपत्तियों के रखरखाव के लिए 20 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

जबलपुर के जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय में पद सृजन

जबलपुर स्थित राजा शंकर शाह-कुंवर रघुनाथ शाह जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय के नियमित संचालन और रखरखाव के लिए मंत्रि-परिषद ने सहायक अनुसंधान अधिकारी (संग्रहालय प्रभारी) का एक नियमित पद सृजित करने की मंजूरी दी है। इसके साथ ही संचालन एवं संधारण पर वार्षिक 83 लाख 18 हजार रुपये खर्च करने की स्वीकृति भी दी गई है।

संग्रहालय प्रभारी संस्था के नियमित संचालन, देखरेख, प्रशासनिक कार्यों और जनजातीय कार्य विभाग सहित अन्य विभागों के साथ समन्वय की जिम्मेदारी निभाएंगे। स्वीकृत राशि का उपयोग प्रशासनिक खर्च, बिजली-पानी, भवन के रखरखाव और अन्य आवश्यक कार्यों में किया जाएगा।


गोवर्धन पूजा पर वृंदावन ग्रामों में पशुपालकों के बीच होंगी प्रतियोगिताएं, विजेताओं को मिलेगा गोपाल कृष्ण ग्राम पुरस्कार

18 नवंबर को गांधीसागर में होगी अगली डेस्टिनेशन कैबिनेट, उद्योग और ऊर्जा क्षेत्र पर रहेगा विशेष ध्यान

इंदौर, 3 नवंबर 2026।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंत्रि-परिषद की बैठक से पहले अपने संबोधन में प्रदेशवासियों को दीपावली पर्व की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कामना की कि दीपों का यह महापर्व हर व्यक्ति के जीवन में नई ऊर्जा, समृद्धि और खुशहाली लेकर आए। मां लक्ष्मी और भगवान श्रीगणेश के आशीर्वाद से प्रत्येक घर में सुख, प्रकाश और आनंद बना रहे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि धनतेरस, रूप चौदस, दीपावली, गोवर्धन पूजा और भाई-दूज के पांचों पर्व सभी के लिए मंगलकारी हों। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के ‘लोकल को वोकल’ मंत्र का उल्लेख करते हुए लोगों से दीपावली की खरीदारी में स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता देने की अपील की। उन्होंने कहा कि स्थानीय छोटे कारोबारियों और माटीकला से जुड़े शिल्पकारों से खरीदारी कर उनके जीवन में भी खुशहाली लाई जा सकती है।

गोवर्धन पर्व को प्रकृति, पर्वत और गौवंश संरक्षण की प्राचीन भारतीय परंपरा का प्रतीक बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस अवसर पर हर घर गौशाला और हर गांव वृंदावन का स्वरूप ले लेता है। इस वर्ष गोवर्धन पूजा पर वृंदावन ग्रामों के पशुपालकों के लिए प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। इनमें प्रथम तीन स्थान प्राप्त करने वालों को गोपाल कृष्ण ग्राम पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे।

मध्यप्रदेश स्थापना दिवस पर किसान कल्याण और कृषि विकास को प्राथमिकता

मुख्यमंत्री ने बताया कि इस वर्ष प्रदेश का 71वां स्थापना दिवस किसान कल्याण और कृषि विकास पर केंद्रित रहा। भगवान श्रीकृष्ण मेधावी विद्यार्थी छात्रवृत्ति के अंतर्गत चयनित विजेताओं को एक-एक लाख रुपये की राशि और प्रशस्ति पत्र दिए जा रहे हैं।

स्थापना दिवस के अवसर पर ‘विरासत से विकास’, किसान बाजार, महिला उद्यमिता मंडप, कृषि प्रदर्शनी, लोक गायन और अनुगूंज सहित कई आयोजन भी किए जा रहे हैं।

इंदौर-उज्जैन-भोपाल क्षेत्र में 20 लाख रोजगार के अवसरों का लक्ष्य

अर्बन ग्रोथ कॉन्क्लेव 2.0 का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2047 तक इंदौर-उज्जैन-भोपाल क्षेत्र में 20 लाख रोजगार के अवसर सृजित करने की योजना है। इसके लिए लगभग 15 टाउनशिप विकसित की जाएंगी और 30 हजार एकड़ क्षेत्र में नियोजित शहरी विकास किया जाएगा।

इंदौर फ्यूचर सिटी में पांच हजार एकड़ क्षेत्र में आवास, उद्योग और रोजगार आधारित विकास की योजना है। अर्बन चैलेंज फंड के अंतर्गत 2,013 करोड़ रुपये की परियोजनाओं के लिए एमओयू किए गए हैं। इस अवसर पर इंदौर आर्थिक क्षेत्र-2047 की रिपोर्ट भी जारी की गई।

मुख्यमंत्री ने बताया कि छह एमओयू के माध्यम से जल संरक्षण, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और शहरी अधोसंरचना के विकास को बढ़ावा मिलेगा। इसके साथ ही ‘मध्यप्रदेश शहरी किफायती आवास एवं पर्यावास नीति-2026’ का प्रारूप जारी किया गया है। यह नीति ‘सबका साथ, सबका विकास और सर्वसमावेशी कल्याण’ की सोच पर आधारित है।

हरदीप सिंह पुरी का मध्यप्रदेश से राज्यसभा नामांकन

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि भारत सरकार के पेट्रोलियम मंत्री श्री हरदीप सिंह पुरी को मध्यप्रदेश से राज्यसभा के लिए नामांकित किया गया है। उन्होंने कहा कि श्री पुरी के राज्यसभा में मध्यप्रदेश का प्रतिनिधित्व करने से देश और प्रदेश के विकास को नए आयाम मिलने की उम्मीद है।

बोमा पद्धति से 1,200 से अधिक कृष्णमृग और नीलगायों का रेस्क्यू

मुख्यमंत्री ने हेलीकॉप्टर की सहायता से बोमा पद्धति पर आधारित वन्यजीव रेस्क्यू अभियान की जानकारी देते हुए इसे दक्षिण एशिया में अपनी तरह का पहला अभियान बताया। उन्होंने कहा कि शाजापुर जिले से अब तक 1,200 से अधिक कृष्णमृगों और नीलगायों का रेस्क्यू किया जा चुका है।

रेस्क्यू किए गए कृष्णमृगों को श्योपुर के जंगलों, गांधीसागर और रानी दुर्गावती रिजर्व फॉरेस्ट सहित निर्धारित वन क्षेत्रों में पहुंचाया गया है। इस पहल से वन्यजीव संरक्षण को मदद मिलने के साथ किसानों की फसलों को नुकसान से बचाने में भी सहायता मिल रही है। मुख्यमंत्री ने इस अभियान के लिए वन विभाग के अधिकारियों को बधाई दी।

शासकीय कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में दो प्रतिशत की बढ़ोतरी

मुख्यमंत्री ने बताया कि त्योहार के अवसर पर राज्य सरकार ने अधिकारी-कर्मचारियों को उपहार देते हुए महंगाई भत्ते में दो प्रतिशत की वृद्धि की है।

धान उपार्जन पंजीयन की अंतिम तारीख 4 नवंबर

किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए धान उपार्जन के लिए पंजीयन की तारीख 4 नवंबर तक बढ़ाई गई है। मुख्यमंत्री ने उन किसान भाइयों से पंजीयन कराने की अपील की, जो अब तक किसी कारणवश अपना पंजीयन नहीं करा सके हैं।

स्वामित्व योजना के तहत 15 नवंबर तक 20 लाख रजिस्ट्री का लक्ष्य

मुख्यमंत्री ने बताया कि धनतेरस के अवसर पर स्वामित्व योजना के तहत गांवों में संपत्ति संबंधी रजिस्ट्री के कार्य को गति दी जाएगी। उन्होंने कहा कि देश के सभी मंत्री, सांसद और विधायक 6 नवंबर को अपने पैतृक गांव अथवा अपनी पसंद के किसी गांव में जाकर स्वामित्व की शत-प्रतिशत रजिस्ट्री का कार्य अपनी मौजूदगी में पूरा कराएंगे। रजिस्ट्री पूरी होने पर संबंधित गांवों में कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।

मुख्यमंत्री के अनुसार प्रदेश में अब तक लगभग 15 लाख रजिस्ट्रियां पूरी की जा चुकी हैं। आगामी 15 नवंबर तक 20 लाख रजिस्ट्रियां पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है।

18 नवंबर को गांधीसागर में अगली डेस्टिनेशन कैबिनेट

मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि अगली डेस्टिनेशन कैबिनेट बैठक 18 नवंबर को मंदसौर जिले के गांधीसागर में प्रस्तावित है। इस बैठक में उद्योग और ऊर्जा क्षेत्र पर विशेष फोकस रहेगा।

उन्होंने बताया कि इससे पहले प्रदेश में आठ डेस्टिनेशन कैबिनेट बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं। इनमें 3 जनवरी 2024 को शक्ति भवन, जबलपुर; 5 अक्टूबर 2024 को सिंग्रामपुर, दमोह; 24 जनवरी 2025 को महेश्वर, खरगोन; 20 मई 2025 को राजवाड़ा, इंदौर; 3 जून 2025 को राजभवन, पचमढ़ी; 9 दिसंबर 2025 को खजुराहो, छतरपुर; 2 मार्च 2026 को नागलवाड़ी, बड़वानी और 19 जुलाई 2026 को जगदीशपुर, भोपाल में बैठकें आयोजित हुई थीं।

सच के पीछे की खबर, सच्चा दोस्त न्यूज़ नेटवर्क (SDNA)



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