सवाल बन संयुक्त राष्ट्र तक पहुंची नेपाल की तबाही: हिमालयी आपदाओं का नुकसान कौन उठाएगा?
जलवायु संकट ने बदली पहाड़ों की चुनौती, अब राहत से आगे बढ़कर वैज्ञानिक निगरानी, सीमा-पार चेतावनी और जलवायु वित्त की जरूरत
विशेष आलेख
हिमालय केवल बर्फ से ढकी पर्वत श्रृंखलाओं का नाम नहीं है। यह एशिया की करोड़ों आबादी के लिए जल, पर्यावरण और जीवन का आधार है। लेकिन बदलती जलवायु ने हिमालयी क्षेत्र के सामने ऐसे खतरे खड़े कर दिए हैं, जिनका असर अब केवल किसी एक गांव, जिले या देश तक सीमित नहीं रह गया है।
नेपाल में सामने आई विनाशकारी प्राकृतिक आपदाओं ने इसी व्यापक संकट को अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने का काम किया है। जब किसी देश को बार-बार बाढ़, भूस्खलन, ग्लेशियरों से जुड़े जोखिम और अत्यधिक वर्षा जैसी घटनाओं का सामना करना पड़ता है, तो सवाल केवल राहत और पुनर्वास का नहीं रहता। सवाल यह भी बनता है कि जलवायु परिवर्तन से बढ़ते नुकसान की आर्थिक और सामाजिक कीमत कौन उठाएगा?
यही प्रश्न अब संयुक्त रा...








