Wednesday, November 4

दीपावली से भाई दूज तक पर्वों की तिथियां घोषित, 8 नवंबर को लक्ष्मी-गणेश पूजन का शुभ अवसर


स्मृति विज्ञान अवंतिका शोध समिति ने धर्मशास्त्र और ज्योतिषीय गणना के आधार पर जारी किया दीपोत्सव निर्णय; धनतेरस, नरक चतुर्दशी, दीपावली, गोवर्धन पूजा और भाई दूज के लिए बताई तिथियां एवं धार्मिक विधान

उज्जैन। सनातन वैदिक परंपरा में दीपावली केवल रोशनी और खुशियों का पर्व नहीं, बल्कि आस्था, उपासना और धार्मिक मर्यादाओं से जुड़ा विशेष उत्सव है। शास्त्रों में प्रत्येक व्रत एवं त्योहार को निर्धारित तिथि, समय और विधि के अनुसार मनाने का विधान बताया गया है। हालांकि, पंचांग की गणना और शास्त्रीय नियमों की जानकारी के अभाव में कई बार पर्वों की तिथियों को लेकर भ्रम की स्थिति बन जाती है।

इसी विषय को ध्यान में रखते हुए उज्जैन की स्मृति विज्ञान अवंतिका शोध समिति ने विक्रम संवत् 2083 के दीपोत्सव पर्व को लेकर विशेष बैठक आयोजित की। बैठक में धर्मशास्त्रों, ज्योतिषीय गणनाओं और प्राचीन आर्ष वचनों के आधार पर दीपावली सहित अन्य पर्वों की तिथियों और उनके धार्मिक विधान पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। समिति ने वर्षों से जारी अपनी परंपरा के अनुसार इस वर्ष भी दीपोत्सव निर्णय प्रकाशित किया है।

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धनतेरस : 6 नवंबर को यमदीपदान और धन्वंतरि जयंती

समिति के निर्णय के अनुसार, शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 को कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर धनतेरस, धन्वंतरि जयंती और यम प्रीत्यर्थ दीपदान किया जाएगा। इस दिन त्रिफला सहित औषधियों और शुभ वस्तुओं की खरीदारी का भी विशेष महत्व बताया गया है।

सायंकाल प्रदोष काल में यमराज की प्रसन्नता के लिए घर के बाहर दीपदान करने का विधान है। स्कंद पुराण में कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी की रात्रि में यमदीप जलाने से अकाल मृत्यु का भय दूर होने का उल्लेख मिलता है।

नरक चतुर्दशी : यमदीपदान और अभ्यंग स्नान का विधान

समिति के अनुसार, 7 नवंबर 2026, शनिवार को कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी पर यम तर्पण तथा दक्षिण दिशा में चार मुख वाला दीप प्रज्वलित करने का विधान है। शाम के समय यमदीपदान के साथ भगवान विष्णु और शिव मंदिरों में दीप जलाने की परंपरा भी बताई गई है।

ब्रह्म पुराण में चतुर्दशी के दिन नरक से मुक्ति और पापों के नाश की कामना से दीपदान करने का उल्लेख मिलता है।

वहीं, 8 नवंबर 2026, रविवार को प्रातःकाल नरक चतुर्दशी एवं रूप चौदस के अवसर पर सूर्योदय से पहले तेल से अभ्यंग स्नान करना सुख-समृद्धि प्रदान करने वाला माना गया है। ब्रह्म पुराण के अनुसार इस दिन तिल के तेल में लक्ष्मी और जल में गंगा का निवास माना जाता है। मान्यता है कि सूर्योदय से पहले अभ्यंग स्नान और दीपदान करने से यमलोक का भय समाप्त होता है।

भविष्य पुराण में भी कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी के दिन सूर्योदय के समय से पूर्व स्नान करने का विशेष विधान बताया गया है।

8 नवंबर को दीपावली : लक्ष्मी-गणेश और कुबेर पूजन

समिति द्वारा जारी निर्णय में बताया गया है कि 8 नवंबर 2026, रविवार को सुबह 11 बजकर 28 मिनट पर कार्तिक अमावस्या तिथि प्रारंभ होगी। ऐसे में इसी दिन सायंकाल प्रदोष काल में मां लक्ष्मी, भगवान गणेश और कुबेर की पूजा के साथ दीपोत्सव मनाना शास्त्रसम्मत बताया गया है।

दीपावली के अवसर पर घरों और मंदिरों में दीप प्रज्वलित कर सुख, समृद्धि और मंगल की कामना की जाएगी।

9 नवंबर को अन्नकूट और गोवर्धन पूजा

समिति के अनुसार, 9 नवंबर 2026, सोमवार को अमावस्या के बाद प्रतिपदा तिथि में अन्नकूट महोत्सव और गोवर्धन पूजा करना श्रेष्ठ रहेगा। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत धारण करने की लीला का स्मरण करते हुए पूजा-अर्चना की जाएगी।

देवल स्मृति में प्रतिपदा और दर्श तिथि के संयोग से संबंधित धार्मिक विधान का उल्लेख करते हुए गोवर्धन पूजा के लिए तिथि के चयन में विशेष सावधानी रखने की बात कही गई है।

11 नवंबर को भाई दूज और चित्रगुप्त पूजन

दीपोत्सव श्रृंखला का समापन बुधवार, 11 नवंबर 2026 को कार्तिक शुक्ल द्वितीया पर भाई दूज के पर्व के साथ होगा। इसी दिन चित्रगुप्त पूजन करना भी शास्त्रसम्मत बताया गया है। भाई दूज पर बहनें अपने भाइयों के सुखी, स्वस्थ और दीर्घायु जीवन की मंगलकामना करती हैं।

बैठक में विद्वानों ने किया शास्त्रीय पक्ष पर विचार

दीपोत्सव निर्णय को अंतिम रूप देने के लिए आयोजित बैठक में संस्था के संस्थापक डॉ. गोपाल कृष्ण शुक्ला के निर्देशानुसार अध्यक्ष पं. दुर्गेश तारे, उपाध्यक्ष पं. मितेश पांडे, सचिव पं. रामचंद्र नायक सहित पं. राजेश उपाध्याय, पं. रवि दुबे, पं. सर्वेश शर्मा, पं. नितिन समाधियां, पं. धर्मेंद्र शर्मा और पं. हर्षित शर्मा उपस्थित रहे।

समिति का उद्देश्य धर्मशास्त्र और ज्योतिषीय गणनाओं के आधार पर आमजन तक पर्वों की सही तिथियों एवं परंपरागत विधानों की जानकारी पहुंचाना तथा सनातन धर्म की मान्यताओं और सांस्कृतिक परंपराओं का संरक्षण करना है।

जारीकर्ता:
पं. रामचंद्र नायक
सचिव, स्मृति विज्ञान अवंतिका शोध समिति



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