Thursday, November 5

1. किसानों की आय बढ़ाने के लिए आधुनिक खेती, प्राकृतिक कृषि और दुग्ध उत्पादन को मिलेगा बढ़ावा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव


पांढुर्णा के बलराम कृषि महोत्सव में वर्चुअली जुड़े मुख्यमंत्री; प्रगतिशील किसानों, प्रतिभाशाली विद्यार्थियों और पशुपालकों का हुआ सम्मान

जबलपुर, 4 नवंबर 2026। मध्यप्रदेश सरकार किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत बनाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। खेती में आधुनिक तकनीक, प्राकृतिक कृषि और दुग्ध उत्पादन को प्रोत्साहित कर किसानों की आमदनी बढ़ाना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। यह बात मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को पांढुर्णा में आयोजित बलराम कृषि महोत्सव को भोपाल स्थित मुख्यमंत्री निवास से वर्चुअली संबोधित करते हुए कही।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश विकास के नए आयाम स्थापित कर रहा है। किसान, महिला, युवा और गरीब सहित समाज के प्रत्येक वर्ग के कल्याण के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। किसान कल्याण वर्ष के अंतर्गत आयोजित बलराम कृषि महोत्सव किसानों को उन्नत कृषि तकनीक, प्राकृतिक खेती और शासन की किसान हितैषी योजनाओं से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बन रहा है।

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कम बारिश से प्रभावित किसानों को मिलेगी सहायता

डॉ. यादव ने कहा कि पांढुर्णा जिला गेहूं, मक्का, चना, तुअर और संतरा उत्पादन के लिए विशेष पहचान रखता है। यहां कृषि के साथ दुग्ध उत्पादन में भी लगातार संभावनाएं बढ़ रही हैं। कम वर्षा की स्थिति को देखते हुए सर्वे कराया जा रहा है। परिस्थितियों के अनुसार किसानों को हरसंभव सहायता और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

कृषि आधारित इकाइयां बन रहीं रोजगार का माध्यम

पांढुर्णा जिले के प्रभारी मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने कहा कि जिला अब पारंपरिक खेती के साथ कृषि आधारित उत्पादों के निर्माण में भी आगे बढ़ रहा है। यहां स्थापित कृषि आधारित इकाइयों से स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर मिल रहे हैं। उन्होंने ग्रामीणों की संपत्तियों की नि:शुल्क रजिस्ट्री की व्यवस्था के लिए मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया।

मध्यप्रदेश राज्य सहकारी बैंक के प्रशासक महेंद्र सिंह यादव ने किसानों को आधुनिक कृषि नवाचारों से जोड़ने तथा बलराम जयंती को किसान दिवस घोषित करने के लिए मुख्यमंत्री का धन्यवाद किया।

किसानों ने साझा किए सफलता और नवाचार के अनुभव

कार्यक्रम में जिले के प्रगतिशील किसानों ने मुख्यमंत्री से संवाद कर खेती में अपनाई जा रही नई तकनीकों और अपनी उपलब्धियों की जानकारी दी।

  • मटरूलाल डोंगरे, ग्राम भुम्मा, विकासखंड सौंसर: प्राकृतिक खेती से हल्दी, अरहर और गेहूं का उत्पादन कर रहे हैं। उत्पादों का मूल्य संवर्धन कर प्रतिवर्ष 2 से 2.5 लाख रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित करते हैं। उनके प्राकृतिक उत्पाद जापान और ऑस्ट्रेलिया तक पहुंच रहे हैं।
  • नरेंद्र ठाकरे, ग्राम तिगांव: 16 एकड़ में संतरे की खेती से सालाना 15 से 20 लाख रुपये की आय प्राप्त कर रहे हैं। इसके साथ पशुपालन और सब्जी उत्पादन भी करते हैं।
  • रोशनी नरवरे, ग्राम पारडसिंगा: 14 गांवों की 350 महिलाओं को जोड़कर देशी कपास से खादी, सीड बॉल और सीड ज्वेलरी तैयार करवा रही हैं। ऑनलाइन माध्यम से इन उत्पादों की बिक्री कर महिलाएं आय अर्जित कर रही हैं।
  • कृष्ण कुमार रबड़े, पांढुर्णा: पीएमएफएमई योजना की सहायता से दुग्ध प्रसंस्करण इकाई स्थापित की है। पनीर, श्रीखंड, घी और मावा का उत्पादन कर प्रतिवर्ष 8 से 10 लाख रुपये की आय अर्जित कर रहे हैं। उनकी इकाई से 8 से 10 लोगों को रोजगार मिला है।
  • विजेश भादे, ग्राम पिपलानी: आत्मा योजना के तहत बीआरसी सेंटर स्थापित कर 2.5 एकड़ में जैविक खेती कर रहे हैं। पशुपालन और उद्यानिकी को मिलाकर समन्वित खेती से सालाना 3 से 4 लाख रुपये की आय प्राप्त कर रहे हैं।

किसानों, विद्यार्थियों और पशुपालकों का सम्मान

समारोह में उत्कृष्ट कार्य करने वाले किसानों, मेधावी विद्यार्थियों तथा गोपाल कृष्ण ग्राम पुरस्कार योजना के तहत उत्कृष्ट देशी गायों का पालन करने वाले पांच पशुपालकों को सम्मानित किया गया। उपस्थित किसानों को आधुनिक कृषि तकनीक, प्राकृतिक खेती, कृषि यंत्रीकरण और सरकारी योजनाओं की जानकारी भी दी गई।

कार्यक्रम में कलेक्टर नीरज कुमार वशिष्ठ, सांस्कृतिक प्रकोष्ठ संयोजक एवं प्रदेश प्रभारी बलराम कृषि महोत्सव कपिल यार्दे, पूर्व मंत्री नानाभाऊ मोहोड़, संदीप मोहोड़, नगर पालिका अध्यक्ष संदीप घाटोडे, जनपद अध्यक्ष लताबाई तुमडॉम सहित जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।


20 नवंबर को सामूहिक विवाह आयोजनों पर विशेष निगरानी; गांवों और वार्डों में बनेंगे सूचना दल, उड़न दस्ते करेंगे निरीक्षण

जबलपुर, 4 नवंबर 2026। देवउठनी ग्यारस के अवसर पर प्रदेश में होने वाले विवाह आयोजनों के बीच बाल विवाह की घटनाओं को रोकने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग व्यापक अभियान चलाएगा। आगामी 20 नवंबर को बड़ी संख्या में प्रस्तावित सामूहिक विवाह कार्यक्रमों को देखते हुए सभी जिलों को सतर्क रहने और संभावित बाल विवाह रोकने के लिए प्रभावी व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं।

महिला एवं बाल विकास विभाग की सचिव श्रीमती जीवी रश्मि ने बताया कि भारत सरकार के ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ अभियान के अनुरूप प्रदेश में बाल विवाह की घटनाओं को शून्य करने के उद्देश्य से जागरूकता और निगरानी गतिविधियां तेज की जा रही हैं। इसके तहत ग्राम एवं वार्ड स्तर पर सूचना दल गठित होंगे। वहीं जिला और ब्लॉक स्तर पर 24 घंटे सक्रिय कंट्रोल रूम बनाए जाएंगे। विवाह स्थलों की निगरानी के लिए उड़न दस्ते भी तैनात रहेंगे।

पंचायतों और नगरीय निकायों में ली जाएगी शपथ

20 नवंबर को सभी ग्राम पंचायतों और नगरीय निकायों में पंच, सरपंच, पंचायत सचिव, अध्यक्ष और पार्षद बाल विवाह रोकने की शपथ लेंगे। शपथ पत्र पंचायत एवं वार्ड कार्यालयों में प्रदर्शित किए जाएंगे।

विवाह मुहूर्त से कम से कम एक सप्ताह पहले स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से जागरूकता रैलियां निकाली जाएंगी। शासकीय स्कूलों और महाविद्यालयों में विद्यार्थियों को बाल विवाह के दुष्परिणामों तथा शिकायत दर्ज कराने के लिए उपलब्ध हेल्पलाइन की जानकारी दी जाएगी। स्वसहायता समूहों की महिलाएं भी गांवों में सामूहिक चर्चा कर परिवारों को बाल विवाह न करने के लिए प्रेरित करेंगी।

कम उम्र की किशोरियों वाले परिवारों पर रहेगी नजर

आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, आशा कार्यकर्ताओं, ग्राम कोटवारों और पंचायत सचिवों की मदद से 18 वर्ष से कम आयु की अविवाहित किशोरियों की जानकारी जुटाई जाएगी। यह जानकारी जिला पुलिस अधीक्षकों और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को उपलब्ध कराई जाएगी।

संभावित संवेदनशील परिवारों को बाल विवाह से जुड़े कानूनी प्रावधानों और इसके सामाजिक एवं व्यक्तिगत दुष्परिणामों की जानकारी देकर समझाइश दी जाएगी। ऐसे परिवारों पर विशेष निगरानी भी रखी जाएगी।

सूचना दल और उड़न दस्ते करेंगे निगरानी

गांवों और वार्डों में शिक्षकों, स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, स्वसहायता समूहों, शौर्य दल, पंचायत प्रतिनिधियों और जागरूक नागरिकों को शामिल कर सूचना दल बनाए जाएंगे। ये दल विवाह आयोजनों की जानकारी जुटाकर बाल विवाह की आशंका होने पर तत्काल संबंधित अधिकारियों को सूचित करेंगे।

जिला एवं ब्लॉक स्तर के कंट्रोल रूम चौबीसों घंटे सक्रिय रहेंगे। बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारियों के नेतृत्व में गठित उड़न दस्ते सामूहिक विवाह स्थलों का निरीक्षण करेंगे। बाल विवाह की पुष्टि होने पर बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 के तहत कार्रवाई की जाएगी।

अधिकारियों को दिया जाएगा प्रशिक्षण

विभाग ने 6 अक्टूबर 2026 को आयोजित राज्य स्तरीय कार्यशाला में प्रशिक्षित अधिकारियों को मास्टर ट्रेनर के रूप में उपयोग करते हुए जिला स्तर पर प्रशिक्षण कार्यशालाएं आयोजित करने के निर्देश दिए हैं। इनमें राजस्व, पुलिस, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, नगरीय प्रशासन और महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों के बीच समन्वय मजबूत किया जाएगा।

इन नंबरों पर दें बाल विवाह की सूचना

अभियान के दौरान स्थानीय मीडिया, सोशल मीडिया, व्हाट्सएप समूहों और दीवार लेखन के माध्यम से भी जागरूकता फैलाई जाएगी। धर्मगुरुओं, सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों का सहयोग लिया जाएगा।

बाल विवाह की सूचना इन माध्यमों से दी जा सकती है:

  • महिला हेल्पलाइन: 181
  • चाइल्ड हेल्पलाइन: 1098
  • आपातकालीन सेवा: 112
  • स्थानीय जिला कंट्रोल रूम
  • बाल विवाह मुक्त भारत पोर्टल

सभी जिलों को जागरूकता गतिविधियों और रोके गए बाल विवाह के मामलों का विवरण पोर्टल पर दर्ज करने तथा देवउठनी ग्यारस पर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।


कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा ने की योजनाओं की समीक्षा; शिकायतकर्ताओं से सीधे संवाद कर संतुष्टिपूर्ण निराकरण पर दिया जोर

जबलपुर, 4 नवंबर 2026। आम नागरिकों की समस्याओं के समाधान में देरी और लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सीएम हेल्पलाइन पर दर्ज शिकायतों का निराकरण निर्धारित समय-सीमा में और शिकायतकर्ता की संतुष्टि के अनुरूप किया जाए। यह निर्देश कलेक्टर श्री अरुण कुमार विश्वकर्मा ने सीएम हेल्पलाइन और स्वामित्व योजना की प्रगति की समीक्षा के दौरान अधिकारियों को दिए।

कलेक्टर ने लंबित शिकायतों की स्थिति की जानकारी लेते हुए संबंधित अधिकारियों को शिकायतकर्ताओं से सीधे बातचीत करने और उनकी वास्तविक समस्याओं को समझकर समाधान करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि वे स्वयं भी शिकायतकर्ताओं से चर्चा कर शिकायतों के निराकरण की स्थिति की जानकारी लेंगे।

स्वामित्व योजना में शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने पर जोर

स्वामित्व योजना की समीक्षा के दौरान कलेक्टर ने शत-प्रतिशत लक्ष्य प्राप्त करने के निर्देश दिए। उन्होंने लंबित प्रकरणों की स्थिति की जानकारी लेते हुए सभी अनुविभागीय अधिकारियों को नियमित समीक्षा करने और निर्धारित समय-सीमा में मामलों का निराकरण सुनिश्चित करने को कहा।

कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि जनसमस्याओं के समाधान में संवेदनशीलता, तत्परता और जवाबदेही सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। अधिकारियों को शिकायतों के निराकरण में केवल औपचारिकता पूरी करने के बजाय नागरिकों को वास्तविक राहत पहुंचाने पर ध्यान देना होगा।


कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा ने पडुआ गांव में बेलर मशीन से पराली प्रबंधन का देखा प्रदर्शन; रिलायंस और बिजली संयंत्रों में बिक्री की बताई संभावना

जबलपुर, 4 नवंबर 2026। धान की कटाई के बाद खेतों में बचने वाली नरवाई को जलाने के बजाय उसका उपयोग अतिरिक्त आय के साधन के रूप में किया जा सकता है। बेलर मशीन की मदद से नरवाई के बंडल तैयार कर उन्हें औद्योगिक इकाइयों और बिजली संयंत्रों को बेचकर किसान आमदनी बढ़ा सकते हैं। यह बात कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा ने जबलपुर विकासखंड के ग्राम पडुआ में किसान जम्मन पटेल के खेत का निरीक्षण करते हुए कही।

कलेक्टर ने खेत में बेलर मशीन के माध्यम से धान की कटाई के बाद बचे फसल अवशेषों से पराली के गोल बंडल तैयार करने की प्रक्रिया देखी। किसान जम्मन पटेल ने बताया कि वे नरवाई प्रबंधन के लिए इस मशीन का उपयोग अपने खेतों के साथ-साथ दूसरे किसानों के खेतों में भी कर रहे हैं।

कलेक्टर ने किसानों को बताया कि नरवाई और अन्य बायोमास से तैयार बंडलों को रिलायंस तथा बिजली संयंत्रों में बेचकर अतिरिक्त कमाई की जा सकती है। इससे खेतों में फसल अवशेष जलाने की आवश्यकता भी कम होगी।

मिट्टी की उर्वरता और पर्यावरण दोनों को होगा लाभ

उप संचालक कृषि यू.के. कटहरे ने बताया कि खेतों में फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन करने से मिट्टी के पोषक तत्व सुरक्षित रहते हैं और उसकी उपजाऊ क्षमता बनी रहती है। इससे खेतों की नमी और जल संरक्षण में भी मदद मिलती है। नरवाई जलाने की घटनाएं कम होने से वायु प्रदूषण पर नियंत्रण पाने में सहायता मिलेगी।

निरीक्षण के दौरान अनुविभागीय कृषि अधिकारी रश्मि परसाई, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी रामप्यारी धुर्वे और कृषि विस्तार अधिकारी प्रभा सूर्यवंशी सहित कृषि विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।


फ्लोटिंग फिश केज में वैज्ञानिक पद्धति से हो रहा मत्स्य पालन; एकीकृत मत्स्य उद्योग नीति-2026 से मछली पालकों को मिलेगा प्रोत्साहन

जबलपुर, 4 नवंबर 2026। बरगी जलाशय में मत्स्य उत्पादन को बढ़ावा देने और आधुनिक तकनीक से मछली पालन की संभावनाओं का आकलन करने के लिए कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा ने जलाशय में स्थापित फ्लोटिंग फिश केज का निरीक्षण किया।

निरीक्षण के दौरान उन्होंने वैज्ञानिक पद्धति से किए जा रहे पंगेसियस मछली पालन की प्रक्रिया देखी। कलेक्टर ने मछली उत्पादन की वर्तमान स्थिति, मछलियों की वृद्धि और भविष्य में उत्पादन क्षमता बढ़ाने की संभावनाओं के बारे में अधिकारियों से जानकारी प्राप्त की।

सहायक संचालक मत्स्य उद्योग राजा राज तिलक धुर्वे ने बताया कि राज्य सरकार की एकीकृत मत्स्य उद्योग नीति-2026 के तहत मत्स्य पालकों और समूहों को आधुनिक तकनीक, मछली प्रसंस्करण, विपणन और वित्तीय प्रोत्साहन से जोड़ने की पहल की जा रही है। इसका उद्देश्य जलाशयों का बेहतर उपयोग कर मत्स्य उत्पादन को बढ़ावा देना है।

उन्होंने कलेक्टर को केज कल्चर की कार्यप्रणाली, पंगेसियस मछली की वृद्धि दर और उत्पादन क्षमता के संबंध में विस्तार से जानकारी दी।

निरीक्षण के दौरान जलाशय प्रभारी दिव्या केरकेट्टा, उप संचालक कृषि उमेश कटहरे सहित मत्स्य विभाग और संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।


राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग के सदस्य भगत सिंह नेताम ने बंदियों से किया सीधा संवाद; पाकशाला और महिला बंदियों के कार्यों का भी लिया जायजा

जबलपुर, 4 नवंबर 2026। आर्थिक कमजोरी, अशिक्षा या कानूनी जानकारी के अभाव में किसी बंदी को अनावश्यक रूप से लंबे समय तक जेल में नहीं रहना पड़े, इसके लिए मामलों की पहचान और समय पर कानूनी सहायता सुनिश्चित करना जरूरी है। इसी उद्देश्य से मध्यप्रदेश राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग के सदस्य भगत सिंह नेताम ने नेताजी सुभाषचंद्र बोस केंद्रीय जेल का निरीक्षण कर जनजातीय वर्ग के बंदियों की समस्याएं सुनीं।

निरीक्षण के दौरान आयोग सदस्य ने अनुसूचित जनजाति वर्ग के बंदियों से सीधे बातचीत की और उनकी जमानत, अपील तथा कानूनी सहायता की प्रक्रिया में आ रही परेशानियों की जानकारी ली। उन्होंने विशेष रूप से ऐसे बंदियों के मामलों पर ध्यान दिया, जो छोटे-छोटे प्रकरणों में लंबे समय से जेल में बंद हैं और जिन्हें पर्याप्त कानूनी मदद नहीं मिल पा रही है।

जमानत और अपील में देरी के कारणों की ली जानकारी

भगत सिंह नेताम ने आजीवन कारावास की सजा काट रहे बंदियों से भी चर्चा की। उन्होंने जेल की व्यवस्थाओं, भोजन, स्वास्थ्य सुविधाओं और शासन की ओर से उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं के बारे में जानकारी प्राप्त की। इस दौरान एक नक्सली बंदी से भी संवाद किया गया।

आयोग सदस्य ने यह जानने का प्रयास किया कि बंदियों को अपील प्रस्तुत करने, जमानत प्राप्त करने और कानूनी सहायता हासिल करने में किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि अशिक्षा, अज्ञानता और आर्थिक अभाव के कारण किसी व्यक्ति को अनावश्यक रूप से जेल में समय बिताने की स्थिति नहीं बननी चाहिए।

उन्होंने बताया कि निरीक्षण के दौरान सामने आई समस्याओं और बंदियों से प्राप्त जानकारियों के आधार पर आयोग शासन को आवश्यक सिफारिशें प्रस्तुत करेगा, ताकि जरूरतमंद बंदियों को उचित कानूनी सहायता और न्याय मिल सके।

भोजन व्यवस्था और महिला बंदियों के कार्यों का भी निरीक्षण

निरीक्षण के दौरान नेताम ने जेल की पाकशाला में बंदियों के लिए तैयार किए जा रहे भोजन की व्यवस्था देखी। उन्होंने महिला बंदियों से बातचीत कर उनकी समस्याएं जानीं और उनके द्वारा किए जा रहे कार्यों का अवलोकन भी किया।

उन्होंने कहा कि आयोग का प्रमुख उद्देश्य अनुसूचित जनजाति वर्ग के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करना तथा उत्पीड़न, भेदभाव और सुविधाओं के अभाव से जुड़े मामलों में उचित हस्तक्षेप सुनिश्चित करना है।

इस अवसर पर उपायुक्त जनजातीय कार्य विभाग नरोत्तम वरकडे, सहायक आयुक्त वंदना गुप्ता, जेल अधीक्षक अखिलेश तोमर सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।


बरगी क्षेत्र में निर्माणाधीन इंटेक वेल का औचक निरीक्षण; समय-सीमा में काम पूरा करने के लिए बढ़ाई जाएगी मैनपावर

जबलपुर, 4 नवंबर 2026। पड़वार-पड़रिया समूह जल प्रदाय योजना के निर्माण कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में पूरा करने के लिए कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा ने संबंधित अधिकारियों को काम में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं।

बरगी क्षेत्र के भ्रमण के दौरान कलेक्टर ने योजना के तहत निर्माणाधीन इंटेक वेल और उससे जुड़ी जल संरचनाओं का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने मौके पर कार्य कर रहे कर्मचारियों से निर्माण की वर्तमान स्थिति और परियोजना की प्रगति की जानकारी ली।

कलेक्टर ने निर्माण कार्यों की गति बढ़ाने के लिए श्रमिकों और तकनीकी कर्मचारियों की संख्या यानी मैनपावर बढ़ाने को कहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि परियोजना का काम निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरा किया जाए, ताकि योजना का लाभ संबंधित क्षेत्र के लोगों को समय पर मिल सके।

निरीक्षण के दौरान जल निगम के कर्मचारी उपस्थित रहे।


मुन्नालाल से फोन पर बात कर जानी समस्या; सीएम हेल्पलाइन का समाधान केवल औपचारिक जवाब नहीं, वास्तविक राहत देकर करें अधिकारी

जबलपुर, 4 नवंबर 2026। सीएम हेल्पलाइन पर दर्ज शिकायतों का निराकरण केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहना चाहिए। शिकायतकर्ता की समस्या का वास्तविक समाधान करना अधिकारियों की जिम्मेदारी है। इस मामले में लापरवाही पाए जाने पर संबंधित कर्मचारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा ने बुधवार शाम सीएम हेल्पलाइन और स्वामित्व योजना के कार्यों की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को यह निर्देश दिए।

बैठक में कलेक्टर ने दिनभर में हुए कार्यों की प्रगति की जानकारी ली और लंबित शिकायतों का शीघ्र निराकरण करने को कहा। इस दौरान उन्होंने कई शिकायतकर्ताओं से फोन पर सीधे बातचीत कर उनकी समस्याएं भी जानीं।

60 दिन बाद भी नहीं मिली आर्थिक सहायता

शिकायतकर्ता मुन्नालाल ने कलेक्टर को बताया कि उन्होंने आर्थिक सहायता के लिए सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन 60 दिन बीत जाने के बाद भी उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ।

कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों से प्रकरण की जानकारी ली तो पता चला कि आदेश पत्रक पर हस्ताक्षर नहीं होने के कारण कार्रवाई लंबित थी। इस पर उन्होंने संबंधित तहसीलदार से जवाब मांगा और कहा कि हस्ताक्षर नहीं होने की स्थिति में मामला तत्काल वरिष्ठ अधिकारियों के संज्ञान में लाया जाना चाहिए था अथवा नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए थी।

कलेक्टर ने कहा कि अधिकारी की निगरानी में कमी के कारण मुन्नालाल को लंबे समय तक परेशान होना पड़ा। उन्होंने मामले में लापरवाही करने वाले संबंधित कर्मचारी को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए।

आर्थिक सहायता के मामलों में संवेदनशीलता जरूरी

कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि आर्थिक सहायता से जुड़े प्रकरणों में संवेदनशीलता के साथ तत्काल निर्णय लें। पात्रता के अनुसार राशि स्वीकृत की जाए और यदि किसी मामले में सहायता देना संभव नहीं है तो उसके स्पष्ट कारणों के साथ प्रकरण अस्वीकृत किया जाए।

उन्होंने राजस्व विभाग की लंबित शिकायतों की समीक्षा करते हुए कहा कि अधिकारी सीएम हेल्पलाइन के निराकरण की जिम्मेदारी केवल कर्मचारियों और बाबुओं पर न छोड़ें। सभी राजस्व अधिकारी प्रतिदिन कम से कम दो घंटे शिकायतों के समाधान के लिए दें और स्वयं उनकी समीक्षा करें।

सभी एसडीएम को अपने-अपने अनुभाग में तहसीलदार, नायब तहसीलदार और मैदानी अमले की जिम्मेदारी तय करने तथा नियमित निगरानी करने के निर्देश भी दिए गए।

स्वामित्व योजना में गुणवत्ता और शुद्धता पर विशेष ध्यान

कलेक्टर ने स्वामित्व योजना के अंतर्गत रजिस्ट्री कार्यों की समीक्षा करते हुए गति के साथ गुणवत्ता और शुद्धता बनाए रखने पर जोर दिया। उन्होंने आबादी क्षेत्र की चौहद्दी निर्धारित करने के दौरान ड्रोन सर्वे पूरी तरह नहीं होने अथवा किसी प्रकार की कमी रह जाने वाले मामलों की जांच करने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि योजना के क्रियान्वयन में सभी अधिकारी सक्रियता से काम करें और यह सुनिश्चित करें कि रजिस्ट्री की प्रक्रिया में किसी तरह की त्रुटि न रहे।

बैठक में अपर कलेक्टर नीता राठौर, रविशंकर राय, शैलेंद्र सिंह, अखिलेश सिंह सहित सभी अनुविभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

(SDNA | सच के साथ, समाज की आवाज़)



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