Thursday, November 5

साहित्य और कविता के रंग में रंगी विदिशा की शाम, भारतीय साहित्य एवं कला परिषद का 37वाँ वार्षिक आयोजन दो सत्रों में संपन्न


माता-पिता की स्मृति में बिहारीलाल सोनी ‘अनुज’ ने आयोजित किया साहित्यिक समारोह; देशभर से आए करीब 80 कवियों ने रचनाओं से बांधा समां

विदिशा। (शोभित जैन – नगर प्रतिनिधि) भारतीय साहित्य एवं कला परिषद की ओर से साहित्य, कविता और कला को समर्पित 37वें विशेष वार्षिक कार्यक्रम का भव्य आयोजन संस्था के अध्यक्ष बिहारीलाल सोनी ‘अनुज’ के निवास पर किया गया। यह आयोजन उनके दिवंगत माता-पिता स्व. बाबूलाल सोनी एवं स्व. लीला देवी सोनी की स्मृति को समर्पित रहा। दो सत्रों में आयोजित इस साहित्यिक समारोह में शहर सहित दूर-दराज से पहुंचे साहित्यकारों और कवियों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।

कार्यक्रम का पहला सत्र ‘विचार और काव्य की त्रिवेणी’ विषय पर केंद्रित रहा। इसकी अध्यक्षता बैंकर्स साहित्य एवं कला परिषद के अध्यक्ष और वरिष्ठ साहित्यकार गोकुल सोनी ने की। रामायण शोध केंद्र के निदेशक एवं तीर्थ एवं मेला विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी डॉ. राजेश श्रीवास्तव मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। वरिष्ठ गीतकार विमल भंडारी ने अपने प्रभावशाली संचालन से सत्र को साहित्यिक गरिमा प्रदान की।

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समारोह की शुरुआत प्रतिभा द्विवेदी की सरस्वती वंदना से हुई। इसके बाद संस्था अध्यक्ष बिहारीलाल सोनी ‘अनुज’ ने स्वागत उद्बोधन दिया। अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में उन्होंने कहा कि परिवारों में बढ़ते विखंडन के इस दौर में माता-पिता की स्मृति में होने वाले ऐसे आयोजन उनके संस्कारों और योगदान को पीढ़ियों तक जीवित रखने के साथ समाज को प्रेरणा भी देते हैं। मुख्य अतिथि डॉ. राजेश श्रीवास्तव ने भी साहित्यिक और पारिवारिक स्मृतियों से जुड़े आयोजनों को महत्वपूर्ण बताते हुए उनकी आवश्यकता पर जोर दिया।

पहले सत्र में काव्य पाठ का सिलसिला शुरू हुआ तो मंच पर एक से बढ़कर एक रचनाएं प्रस्तुत की गईं। विदिशा से आए कवि लायन अरुण कुमार सोनी ने अपनी गजल की पंक्तियों—“दिल-ए-नादाँ पे हम अपना मलाल-ए-यार लिखते हैं, उदासी में भी हम अपना खुशी से हाल लिखते हैं”—से श्रोताओं की खूब सराहना बटोरी। कालापीपल के कवि राकेश कुमार सोनी ‘बिंदास’ ने “सुखनबरों की सोहबत में निखर रहा हूं” रचना सुनाकर काव्यात्मक वातावरण को और समृद्ध किया।

इस अवसर पर अनिशा जैन, डॉ. अमित मालवीय हर्ष, कमलेश नूर, दिनेश गुप्ता ‘मकरंद’, उमेश तिवारी ‘आरोही’, अशोक गौतम ‘घायल’, राममोहन चौकसे, रामकुमार सोनी ‘राही’, अशोक निर्मल, हरिओम श्रीवास्तव, महेश अग्रवाल, किशन तिवारी, सत्यदेव सोनी, डॉ. प्रमोद सक्सेना ‘पुष्कर’, प्रदीप मोहबे, शिवकुमार दीवान और चंद्रभान सिंह पवार ‘चंदर’ सहित अनेक रचनाकारों ने अपनी कविताओं और गीतों से श्रोताओं को बांधे रखा। कार्यक्रम के बीच ‘लाफ्टर चैलेंज’ फेम ओ.पी. द्विवेदी ने हास्य-व्यंग्य की क्षणिकाओं और मिमिक्री के जरिए खूब ठहाके लगवाए।

समारोह का दूसरा सत्र भव्य काव्य गोष्ठी के रूप में आयोजित हुआ। इसकी अध्यक्षता हिन्दी भवन के उप मंत्री संचालक डॉ. संजय सक्सेना ने की, जबकि मनासा के वरिष्ठ कवि भेरूंलाल सुनार मुख्य अतिथि के रूप में मंच पर उपस्थित रहे। कवि सत्यदेव सोनी ‘सत्य’ ने काव्यात्मक अंदाज में सत्र का संचालन किया।

दूसरे सत्र में तुलसी साहित्य अकादमी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मोहन तिवारी ‘आनंद’, सुरेश पटवा, डॉ. राजेश तिवारी, अशोक धमैनिया, वी.के. श्रीवास्तव, श्रीराम माहेश्वरी, होशियार सिंह पटेल, हरिओम श्रीवास्तव, कविता सिरोले, अशोक व्यास, उमेश तिवारी, सुषमा अनिल श्रीवास्तव, प्रतिभा द्विवेदी, प्रमिला झरबडे, क्षमा निमौरे, रामकिशोर श्रीवास्तव ‘रवि’, डॉ. रमेश भूमरकर, प्रवीण शर्मा, भंवरलाल श्रीवास, कैलाश श्रीवास्तव ‘आदमी’, चन्द्रहास शुक्ल और डॉ. अशोक व्यास सहित अनेक कवियों ने अपनी रचनाओं का पाठ किया। उनकी प्रस्तुतियों को उपस्थित साहित्य प्रेमियों ने सराहा।

शहर और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में साहित्य अनुरागियों तथा परिजनों की मौजूदगी ने आयोजन की गरिमा बढ़ाई। देर रात तक चले इस साहित्यिक महाकुंभ में लगभग 80 कवियों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं। कवि बिहारीलाल सोनी ‘अनुज’ की इस पहल की उपस्थित लोगों ने मुक्तकंठ से प्रशंसा की। कार्यक्रम के समापन पर वरिष्ठ पत्रकार राममोहन चौकसे ने सभी अतिथियों, कवियों और उपस्थित जनों के प्रति आभार व्यक्त किया।

(SDNA | सच के साथ, समाज की आवाज़)



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