Thursday, November 5

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विपक्षी प्रदर्शनों के बीच सोनम वांगचुक की एंट्री, बोले—देश अघोषित आपातकाल की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है!
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विपक्षी प्रदर्शनों के बीच सोनम वांगचुक की एंट्री, बोले—देश अघोषित आपातकाल की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है!

नेताओं, सांसदों, पत्रकारों और वकीलों की गिरफ्तारियों के बीच वांगचुक ने जताई चिंता, लोकतांत्रिक अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर छिड़ी बहस नई दिल्ली | SDNA देश में विपक्षी आंदोलनों और विरोध प्रदर्शनों के दौरान नेताओं, सांसदों, पत्रकारों, वकीलों तथा अन्य प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारियों के बीच सामाजिक कार्यकर्ता एवं जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का बयान चर्चा में आ गया है। वांगचुक ने मौजूदा परिस्थितियों पर चिंता जताते हुए कहा कि देश अघोषित आपातकाल की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। वांगचुक की यह टिप्पणी ऐसे समय सामने आई है, जब विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की कार्रवाई, प्रदर्शनकारियों की हिरासत और लोकतांत्रिक तरीके से असहमति व्यक्त करने के अधिकार को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। गिरफ्तारी की कार्रवाई और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सवाल विपक्षी आंदोलनों में शामिल लोगों की गिरफ्...
सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे पर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, ज्ञानेश कुमार से जुड़े विवाद ने पकड़ा कानूनी मोड़
Judiciary & Legal, Natioanal, Supreme Court

सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे पर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, ज्ञानेश कुमार से जुड़े विवाद ने पकड़ा कानूनी मोड़

SIR, मतदाता सूची और चुनावी पारदर्शिता पर विपक्ष के सवाल; 13 अक्टूबर की संभावित सुनवाई पर देश की नजर नई दिल्ली | SDNA देश में चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता, मतदाता सूची की विश्वसनीयता और चुनाव आयोग की जवाबदेही को लेकर चल रही बहस अब एक महत्वपूर्ण कानूनी मोड़ पर पहुंच गई है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विपक्ष की ओर से उठाए गए सवालों के बीच सुप्रीम कोर्ट में याचिकाओं और सुनवाई की चर्चा तेज हो गई है। 13 अक्टूबर 2026 को संभावित सुनवाई को लेकर भी राजनीतिक और कानूनी हलकों में उत्सुकता बनी हुई है। लेकिन इस घटनाक्रम को केवल सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव के रूप में देखना अधूरा होगा। इसके पीछे एक बड़ा सवाल है—लोकतंत्र में मतदाता की भागीदारी सुनिश्चित करने और चुनावी व्यवस्था पर जनता का भरोसा बनाए रखने की जिम्मेदारी आखिर...
राहुल गांधी का इशारों में प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना! बोले—ज्ञानेश कुमार अपराधी नहीं, उनसे कराई जा रही गड़बड़ी
Natioanal, Political Press Conferences, Politics

राहुल गांधी का इशारों में प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना! बोले—ज्ञानेश कुमार अपराधी नहीं, उनसे कराई जा रही गड़बड़ी

मुख्य चुनाव आयुक्त के बहाने सत्ता के शीर्ष तक पहुंचा राहुल का सियासी हमला, बिना नाम लिए प्रधानमंत्री पर साधा निशाना नई दिल्ली | SDNA कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर दिए गए बयान से सियासी हलचल तेज कर दी है। राहुल गांधी ने कहा कि ज्ञानेश कुमार अपराधी नहीं हैं, बल्कि उनसे गड़बड़ी कराई जा रही है। उनके इस बयान को सत्ता के शीर्ष नेतृत्व पर परोक्ष निशाने के रूप में भी देखा जा रहा है। राहुल गांधी ने अपने बयान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया, लेकिन उनके शब्दों और राजनीतिक संदर्भ को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। उन्होंने संकेतों में सवाल उठाया कि यदि किसी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति से गलत काम कराया जा रहा है, तो उसके पीछे जिम्मेदारी किसकी है? नाम लिए बिना सत्ता के शीर्ष पर सवाल राहुल गांधी के बयान का राजनीतिक संदेश केवल ...
VEDIO: दिल्ली में धारा 163 के नाम पर यातायात रोकने पर पुलिस से भिड़े अधिवक्ता प्रताप भानु, आदेश की प्रति मांगने वाला वीडियो वायरल
Delhi (National Capital Territory), Natioanal, Union Territories

VEDIO: दिल्ली में धारा 163 के नाम पर यातायात रोकने पर पुलिस से भिड़े अधिवक्ता प्रताप भानु, आदेश की प्रति मांगने वाला वीडियो वायरल

“जब रोकने का आदेश है, तो उसकी कॉपी दिखाइए” — कानून के पालन और जवाबदेही को लेकर सोशल मीडिया पर छिड़ी चर्चा नई दिल्ली | SDNA दिल्ली में 10 अक्टूबर को धारा 163 का हवाला देकर छावनी क्षेत्र में आवाजाही और यातायात प्रभावित किए जाने को लेकर पुलिस और एक अधिवक्ता के बीच हुई बहस का वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में एससी अधिवक्ता प्रताप भानु पुलिस अधिकारियों से कथित प्रतिबंधात्मक आदेश की प्रति दिखाने की मांग करते नजर आ रहे हैं। इस घटनाक्रम ने कानून के पालन, प्रशासनिक कार्रवाई और नागरिकों के अधिकारों को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है। वायरल वीडियो में अधिवक्ता प्रताप भानु पुलिसकर्मियों से सवाल करते दिखाई देते हैं कि यदि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत यातायात रोकने या आवाजाही प्रतिबंधित करने का आदेश जारी किया गया है, तो उसकी प्रति उन्हें दिखाई जाए। उ...
LVGC की ‘नारी शक्ति’ पहल: महिलाओं को उद्यमिता से जोड़ने के लिए देशभर के जनप्रतिनिधियों और पद्म पुरस्कार विजेताओं से मांगा आशीर्वाद
Business & Economy, Natioanal

LVGC की ‘नारी शक्ति’ पहल: महिलाओं को उद्यमिता से जोड़ने के लिए देशभर के जनप्रतिनिधियों और पद्म पुरस्कार विजेताओं से मांगा आशीर्वाद

कम निवेश में महिलाओं को आत्मनिर्भर उद्यमी बनाने का प्रयास, ₹9,000 के शुरुआती निवेश से व्यवसाय शुरू करने की पहल (SDNA) | विशेष संवाददाता इंदौर/सिलीगुड़ी। देश की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और उन्हें उद्यमिता के क्षेत्र में आगे बढ़ाने के उद्देश्य से लूनिया विनायक ग्रुप ऑफ कंपनीज (LVGC) द्वारा ‘नारी शक्ति कार्यक्रम’ संचालित किया जा रहा है। इस पहल की जानकारी साझा करते हुए LVGC के प्रमुख डॉ. विनायक अशोक लूनिया जैन ने देश के सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों, राज्यपालों, मंत्रियों, विधायकों, सांसदों तथा पद्म पुरस्कार से सम्मानित विभूतियों को पत्र लिखकर कार्यक्रम की सफलता के लिए आशीर्वाद एवं मार्गदर्शन मांगा है। LVGC के जनसंपर्क विभाग की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया कि इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य शिक्षित, अल्पशिक्षित और गृहिणी महिलाओं को कम निवेश में स्वरोजगार तथा उद्...
जेन-Z की हुंकार से सत्ता में बेचैनी? नेपाल-बांग्लादेश के बाद भारत में भी उभर रही नई राजनीतिक चुनौती!
Editorial, Natioanal

जेन-Z की हुंकार से सत्ता में बेचैनी? नेपाल-बांग्लादेश के बाद भारत में भी उभर रही नई राजनीतिक चुनौती!

नीट विवाद से चुनावी पारदर्शिता तक पहुंचा युवा आंदोलन; 10 अक्टूबर के जंतर-मंतर प्रदर्शन और दिल्ली की कड़ी सुरक्षा ने लोकतंत्र, जवाबदेही तथा विरोध के अधिकार पर बहस तेज की (SDNA) विशेष आलेख भारत में जेन-Z यानी नई युवा पीढ़ी का आंदोलनकारी तेवर अब केवल सोशल मीडिया की बहस नहीं रह गया है। परीक्षा व्यवस्था में कथित गड़बड़ियों से लेकर चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता तक, युवा पीढ़ी जिस तरह सवाल उठा रही है, उसने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है। सवाल यह है कि क्या यह असंतोष किसी व्यापक राजनीतिक आंदोलन का रूप ले सकता है? क्या भारत में भी युवा शक्ति ऐसी चुनौती बन सकती है, जैसी हाल के वर्षों में नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका में देखने को मिली? 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित युवा विरोध प्रदर्शन और उसके मद्देनजर राजधानी में किए गए व्यापक सुरक्षा इंतजामों ने इस बहस को और त...
₹30 हजार से कम में स्मार्टफोन खरीदने के 5 विकल्प, जानें किस फोन में मिलती है दमदार बैटरी और शानदार डिस्प्ले
Natioanal, technology

₹30 हजार से कम में स्मार्टफोन खरीदने के 5 विकल्प, जानें किस फोन में मिलती है दमदार बैटरी और शानदार डिस्प्ले

बढ़ती कीमतों के बीच बजट में फोन चुनना चुनौतीपूर्ण; Samsung, iQOO, OnePlus, Redmi और Motorola के मॉडल पर डालें नजर (SDNA) टेक्नोलॉजी डेस्क। स्मार्टफोन बाजार में बढ़ती कीमतों के बीच 30 हजार रुपये तक के बजट में बेहतर फोन तलाशना ग्राहकों के लिए मुश्किल होता जा रहा है। बेहतर कैमरा, दमदार प्रोसेसर, लंबी बैटरी लाइफ और लंबे समय तक सॉफ्टवेयर अपडेट की चाह रखने वाले खरीदारों के सामने कई विकल्प हैं। ऐसे में फोन खरीदने से पहले अपनी जरूरत और बजट के अनुसार फीचर्स की तुलना करना जरूरी है। यहां पांच स्मार्टफोन विकल्पों का विवरण दिया गया है, जिनकी कीमतें और उपलब्धता खरीदारी के समय ऑनलाइन या ऑफलाइन बाजार में बदल सकती हैं। 1. Samsung Galaxy A36 5G सैमसंग का यह मॉडल उन ग्राहकों के लिए विकल्प हो सकता है, जो गैर-चीनी ब्रांड का फोन और लंबे समय तक सॉफ्टवेयर सपोर्ट चाहते हैं। इसमें 6.7 इंच का फुल HD+ Sup...
‘गांधी-नेहरू के नाम पर नहीं चलेगी राजनीति, अपना नेतृत्व खुद तैयार करें’: आजमगढ़ में ओवैसी का बयान
North Zone STATES, Politics, Uttar Pradesh

‘गांधी-नेहरू के नाम पर नहीं चलेगी राजनीति, अपना नेतृत्व खुद तैयार करें’: आजमगढ़ में ओवैसी का बयान

AIMIM प्रमुख ने कहा—किसी के पीछे अंधाधुंध चलने की जरूरत नहीं; अखिलेश यादव पर लगाए मुस्लिम समाज के इस्तेमाल के आरोप, युवाओं की हिरासत को लेकर भी उठाए सवाल (SDNA) आजमगढ़। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने आजमगढ़ की जनसभा में अपने नेतृत्व और राजनीतिक अधिकारों को लेकर जोरदार बयान दिया। उन्होंने कहा कि अब किसी गांधी या नेहरू के नाम के सहारे राजनीति करने वालों के पीछे चलने के बजाय लोगों को अपना नेतृत्व स्वयं तैयार करना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि वे किसी के गुलाम नहीं हैं। अमौड़ा में आयोजित जनसभा के दौरान ओवैसी ने आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर पार्टी प्रत्याशियों के समर्थन में अपील की। उन्होंने कहा कि समाज की समस्याओं को उठाने के लिए अपने बीच से नेता तैयार करने होंगे। उनके मुताबिक, केवल किसी नेता के खुद को गांधी या नेहरू जैसा बताने से उसका अनु...
दिल्ली में ‘दो नेहा बोरा’ की चर्चा, हमशक्ल को पकड़ने के चक्कर में उलझी पुलिस; कनॉट प्लेस में असली नेहा भी हिरासत में
Delhi (National Capital Territory), Natioanal, Union Territories

दिल्ली में ‘दो नेहा बोरा’ की चर्चा, हमशक्ल को पकड़ने के चक्कर में उलझी पुलिस; कनॉट प्लेस में असली नेहा भी हिरासत में

आरके आश्रम मेट्रो स्टेशन पर हुई गलत पहचान, सोशल मीडिया पर वायरल हुई असली और नकली नेहा की कहानी (SDNA) नई दिल्ली। दिल्ली में विरोध प्रदर्शन के दौरान ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा को लेकर उस समय दिलचस्प स्थिति बन गई, जब पुलिस ने उनकी हमशक्ल को नेहा समझकर हिरासत में लेने की कोशिश की। दूसरी ओर, असली नेहा बोरा कनॉट प्लेस की ओर बढ़ती दिखाई दीं। इस घटनाक्रम ने सोशल मीडिया पर ‘दो नेहाओं’ की कहानी को चर्चा का विषय बना दिया। रिपोर्ट के अनुसार, रविवार को आरके आश्रम मेट्रो स्टेशन पर प्रस्तावित प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हलचल रही। इसी बीच लाल कपड़ा, मास्क और काला चश्मा पहने एक महिला को नेहा बोरा समझ लिया गया। महिला पुलिसकर्मियों ने उसे हिरासत में लेने का प्रयास किया, लेकिन बाद में स्पष्ट हुआ कि वह नेहा नहीं, बल्कि उनकी हमशक्ल थी। कनॉ...
संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन पर अदालतें हस्तक्षेप करें: CJI सूर्यकांत
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संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन पर अदालतें हस्तक्षेप करें: CJI सूर्यकांत

NHRC के स्थापना दिवस पर बोले मुख्य न्यायाधीश—मानवाधिकारों की रक्षा के लिए व्यवस्था की खामियों को पहचानना और कमजोर वर्गों की आवाज सुनना जरूरी (SDNA) नई दिल्ली। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत ने कहा है कि जब नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन होता है, तब न्यायालयों को हस्तक्षेप करना चाहिए। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के स्थापना दिवस समारोह में उन्होंने मानवाधिकारों की सुरक्षा के लिए न्यायिक संस्थाओं और आयोग की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि मानवाधिकार केवल कानूनी सिद्धांत नहीं हैं, बल्कि इनका सीधा संबंध व्यक्ति के स्वास्थ्य, भोजन, आवास, आजीविका और स्वच्छ पर्यावरण जैसे बुनियादी अधिकारों से है। उन्होंने मानवाधिकार आयोगों से शिकायतों की जांच करने के साथ-साथ प्रशासनिक व्यवस्था की कमियों को पहचानने और उन समस्याओं पर ध्यान देने का आह्वान कि...